- ब्रज की 84 कोस परिक्रमा के दौरान एक बहू ने अपनी बुजुर्ग सास को टब में बैठाकर सिर पर उठाया
- सास की वर्षों पुरानी परिक्रमा करने की इच्छा पूरी करने के लिए बहू ने दिखाई अनोखी सेवा भावना
- वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल, लोग बहू की तुलना श्रवण कुमार जैसी सेवा भावना से कर रहे हैं
उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र से एक ऐसा भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने लोगों को रिश्तों की अहमियत और बुजुर्गों के प्रति सम्मान का संदेश दिया है। आज के समय में जहां अक्सर पारिवारिक रिश्तों में दूरियां बढ़ने की खबरें सुनने को मिलती हैं, वहीं इस घटना ने लोगों का दिल जीत लिया है।
मामला ब्रज की प्रसिद्ध 84 कोस परिक्रमा से जुड़ा है। यह परिक्रमा भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े पवित्र स्थलों की यात्रा मानी जाती है और धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण समझी जाती है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु इस परिक्रमा में भाग लेते हैं।
इसी दौरान एक बहू अपनी बुजुर्ग सास को टब में बैठाकर सिर पर उठाए हुए परिक्रमा मार्ग पर चलती दिखाई दी। यह दृश्य देखकर आसपास मौजूद श्रद्धालु भी भावुक हो गए। जानकारी के अनुसार, बुजुर्ग महिला की लंबे समय से इच्छा थी कि वह जीवन में एक बार 84 कोस परिक्रमा जरूर करें, लेकिन उम्र और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण उनके लिए इतनी लंबी यात्रा करना संभव नहीं था।
बताया जा रहा है कि सास अक्सर अपनी इस इच्छा का जिक्र परिवार के लोगों से करती थीं। जब बहू ने उनकी यह मनोकामना सुनी तो उसने तय किया कि वह किसी भी हाल में अपनी सास की इच्छा पूरी करेगी। इसके बाद उसने अपनी सास को एक टब में बैठाकर सिर पर उठाने का फैसला किया और परिक्रमा मार्ग पर निकल पड़ी।
वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि बहू पूरे आत्मविश्वास और समर्पण के साथ अपनी सास को लेकर आगे बढ़ रही है। रास्ते में मौजूद लोग इस दृश्य को देखकर रुक जाते हैं और उसकी सेवा भावना की सराहना करते नजर आते हैं। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि आधुनिक दौर में इस तरह का समर्पण और सम्मान बहुत कम देखने को मिलता है।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद हजारों लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। कई यूजर्स ने लिखा कि यह घटना परिवार के बुजुर्गों के प्रति प्रेम और सम्मान का शानदार उदाहरण है। कुछ लोगों ने कहा कि बहू ने साबित कर दिया कि रिश्ते केवल खून के नहीं बल्कि सम्मान, विश्वास और सेवा से मजबूत बनते हैं।
कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इस घटना की तुलना पौराणिक कथा के श्रवण कुमार से भी की, जिन्होंने अपने माता-पिता की सेवा के लिए जीवन समर्पित कर दिया था। लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाएं समाज को सकारात्मक संदेश देती हैं और परिवार में बुजुर्गों के सम्मान की भावना को मजबूत करती हैं।



